असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है. हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार में पावर मिनिस्टर नंदिता गोरलोसा ने कांग्रेस का ‘हाथ’ थाम लिया है. यह सब ऐसे समय में हुआ, जब चुनाव तारीखों की घोषणा हो चुकी है. भाजपा ने टिकट नहीं दिया, तो नाराज होकर गोरलोसा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और मंत्री पद छोड़ दिया.
कांग्रेस ने गोरलोसा की सियासी पावर को समझा और हाफलांग विधानसभा सीट से टिकट पा चुके उसके उम्मीदवार निर्मल लंगथासा ने अपने आप सीट खाली कर दी. अब यहां से कांग्रेस के टिकट पर गोरलोसा चुनाव लड़ेंगी. इस समय वह हाफलांग सीट से ही विधायक हैं. उनका जन्म यहीं पर हुआ. ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण है कि गोरलोसा का भाजपा से जाना कितना बड़ा झटका है.
गोरलोसा भाजपा को कितना नुकसान पहुंचाएंगी?
गुवाहाटी में Zee मीडिया संवाददाता शरीफुद्दीन ने बताया है कि कार्बी आंगलोंग की तरह दीमा हसाओ भी असम का एक प्रमुख स्वायत्त पर्वतीय जिला है. ये भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत शासित होते हैं. इन्हें विशेष प्रशासनिक अधिकार मिले हुए हैं. यहां जनजातीय वोटर सबसे ज्यादा हैं. शरीफुद्दीन ने कहा कि गोरलोसा स्वायत्त क्षेत्र का बड़ा चेहरा हैं. जनजाति समुदाय में वह लोकप्रिय हैं. साफ है कि भाजपा को नुकसान हो सकता है.
टिकट क्यों नहीं मिला?
इस सवाल का जवाब नहीं मिल पाया कि भाजपा ने अपनी मिनिस्टर को टिकट क्यों नहीं दिया था? क्या आगे उनके लिए कुछ अलग प्लान था या किसी सर्वे के आधार पर उनके जीतने की संभावना कम आंकी गई? हालांकि कई विधायकों के टिकट काटे जाने पर असम के सीएम ने यह जरूर कहा है कि नए चेहरों को मौका देने के लिए पार्टी ने यह रणनीति अपनाई है, जिससे संगठन मजबूत हो.
अब गोरलोसा पहाड़ी जिले दीमा हसाओ के हाफलांग निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी. भाजपा ने इस सीट पर रूपाली लांगथासा को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने एक बयान में कहा, ‘हमें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि नंदिता गोरलोसा कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गई हैं. वह पिछले पांच साल से दीमा हसाओ की आवाज रही हैं. वह हमेशा अपने सिद्धांतों पर कायम रहीं.’ कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हिमंता बिस्वा सरमा की दिलचस्पी सिर्फ आदिवासियों की जमीन बड़े कॉर्पोरेशनों को बेचने में है.
असम में 100 सीटों पर लड़ रही कांग्रेस
126 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. राज्य में उसने असम जातीय परिषद, रायजोर दल, CPI(M), CPI(ML) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन किया है. रायजोर दल 11 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहा है. 126 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान एक ही चरण में 9 अप्रैल को होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी.
पढ़ें: पश्चिम बंगाल में ताल ठोकेंगे ओवैसी, ममता के बागी हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ लड़ेंगे चुनाव
पढ़ें: तमिलनाडु में आएगी DMK सुनामी? 223 सीटों का गणित बता रहा कैसे मीलों पीछे हैं विपक्षी पार्टियां