.
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को नव संवत 2083 का शुभारंभ होगा। पं. यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में नव संवत को रौद्र नाम दिया है।
इस संवत का राजा गुरु है, जो सुख-समृद्धि का प्रतीक है। लोगों में मांगलिक कार्य एवं उत्सव अधिक होने से उल्लास का वातावरण बना रहेगा। इस संवत का वास माली के घर पर रहना अच्छी बारिश का संकेत है। मंत्री मंगल है। इस बार ज्येष्ठ मास अधिक (पुरुषोत्तम) मास रहेगा, जो 17 मई से 15 जून तक है। पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य, व्रत, अनुष्ठान व जाप का अधिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार तीन साल में एक बार अधिक मास आता है।
नव संवत पर ग्रहों की स्थिति: 19 मार्च को सुबह 6.36 बजे सूर्योदय के साथ विक्रम सवंत 2083 शुरू होगा। नव संवत का राजा गुरु मिथुन राशि में होगा। सूर्योदय के समय मीन लग्न रहेगी। मीन लग्न का स्वामी गुरु है, जो ज्ञान, धर्म व प्रजा में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। नव संवत का मंत्री मंगल है, जो कुंभ राशि में विराजमान है। सूर्य, शुक्र और शनि मीन राशि में रहेंगे, जो सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का प्रतीक है। राहु ग्रह कुंभ राशि में और केतु ग्रह सिंह राशि में रहेगा।