
Mohan Bhagwat in Gorakhpur: गोरखपुर में संघ शताब्दी वर्ष की सामाजिक सद्भाव बैठक में मोहन भागवत ने कहा कि आज समाज में संघ से अपेक्षाएं बढ़ी हैं।

मोहन भागवत रविवार को गोरखपुर में संघ शताब्दी वर्ष की सामाजिक सद्भाव बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि अन्य देशों में विचार है कि मनुष्य से मनुष्य का संबंध एक सौदा है, लेकिन अपने देश में मनुष्यों के संबंध का विचार ऐसा नहीं है। यहां संबंध अपनेपन का है। हमारे देश में अनेक विविधताएं और अनेक रीति-रिवाज हैं। यहां विविधता में एकता है क्योंकि यहां एक नाता है-भारत को हम माता मानते हैं।
‘आज समाज में संघ से अपेक्षाएं बढ़ी हैं’
सरसंघचालक ने कहा कि संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पद्धति से ही विकसित हुई है। आज समाज में संघ से अपेक्षाएं बढ़ी हैं। विश्व के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जो समाज को सुख और शांति दे सके इसलिए वह भी हमारी
तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा हैं।
‘हम एक बड़े समाज के लोग हैं’
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे हुए हैं। यह कोई उत्सव की बात नहीं है जिसे करने में 100 वर्ष लग गए, वह और पहले हो जाना चाहिए था। हमें करना यह है कि ब्लॉक स्तर पर वर्ष में 2-3 बार बैठें। हम अपनी जाति की चिंता कर रहे हैं, यह अच्छी बात है लेकिन ध्यान रखें कि हम एक बड़े समाज के लोग हैं। हिंदू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता है। बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पथ के प्रमुख व प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक की प्रस्तावना सह प्रान्त सद्भाव प्रमुख शिवाजी राय ने रखी और सामाजिक सद्भाव प्रमुख डॉ. राकेश कुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया।
