Saturday, March 14, 2026
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Lakhauri Mirch Almora | Pahadi Spices | कुमाऊं की लखौरी मिर्च

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Lakhauri Mirch Almora: पहाड़ के खान-पान की बात हो और अल्मोड़ा की लखौरी मिर्च का जिक्र न आए, ऐसा मुमकिन नहीं है. अपने सुनहरे पीले रंग और जुबान पर चढ़ जाने वाले तीखेपन के कारण यह मिर्च आज उत्तराखंड की सरहदों को पार कर दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही है. आखिर क्यों इस मिर्च को ‘पहाड़ी सोना’ कहा जाता है और कैसे यह एक छोटा सा मसाला पलायन और जंगली जानवरों की मार झेल रहे किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है.

Almora’s Lakhori Chilli

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में कई पारंपरिक कृषि उत्पाद प्रसिद्ध हैं, जिनमें अल्मोड़े की लखौरी मिर्च का विशेष स्थान है. यह मिर्च अपने अलग स्वाद, रंग और तीखेपन के कारण पहाड़ की पहचान बन चुकी है. स्थानीय लोग इसे लखौरी या पीली मिर्च भी कहते हैं. इसका नाम अल्मोड़ा क्षेत्र और लखोरा नामक स्थान से जुड़ा माना जाता है, जहां इस किस्म की मिर्च की खेती सबसे पहले की गई थी.

 Special Features of Lakhori Chilli

लखौरी मिर्च की सबसे बड़ी विशेषता इसका अलग रंग और तीखापन है. जब यह मिर्च सूखती है तो इसका रंग हल्का पीला या सुनहरा दिखाई देता है और इसकी सतह पर हल्की झुर्रियां भी पड़ जाती हैं. इसका स्वाद बहुत तीखा होता है, इसलिए इसे कम मात्रा में ही उपयोग किया जाता है. यही कारण है कि यह मिर्च पहाड़ी व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के लिए खास मानी जाती है.

Cultivation and Production

अल्मोड़ा और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में इस मिर्च की खेती लंबे समय से की जाती रही है. यहां की जलवायु और मिट्टी इस फसल के लिए उपयुक्त मानी जाती है. पहले कई गांवों में किसान बड़े पैमाने पर लखौरी मिर्च उगाते थे और इसे स्थानीय बाजारों में बेचते थे. यह खेती किसानों के लिए अच्छी आय का स्रोत भी थी और पहाड़ी कृषि की पहचान मानी जाती थी.

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Use and taste

लखौरी मिर्च का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है. इसे सुखाकर पाउडर बनाया जाता है, जिससे सब्जियों और दालों का स्वाद बढ़ाया जाता है. इसके अलावा कई जगहों पर इससे मिर्च फ्लेक्स और खास प्रकार का नमक भी बनाया जाता है, जिसे पहाड़ी नमक या मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. नमकीन और स्नैक्स बनाने वाले व्यापारी भी इस मिर्च को पसंद करते हैं क्योंकि इसका रंग और स्वाद दोनों अच्छे होते हैं.

Connection with pahadi culture

लखौरी मिर्च केवल एक मसाला नहीं है, बल्कि यह पहाड़ की परंपरा और संस्कृति का हिस्सा भी है. पहाड़ी घरों में इसे धूप में सुखाकर साल भर के लिए सुरक्षित रखा जाता है. कई पारंपरिक व्यंजनों में इसका उपयोग अनिवार्य माना जाता है. पुराने समय में लोग इसे घर की छत या आंगन में सुखाते थे और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करते थे.

Decline of cultivation

समय के साथ इस मिर्च की खेती में कमी भी देखने को मिली है. जंगली जानवरों के हमले, पलायन और खेती में कम लाभ मिलने के कारण कई किसानों ने इस फसल से दूरी बना ली है. रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्षों में हजारों किसान मिर्च की खेती छोड़ चुके हैं, जिससे इस पारंपरिक फसल का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है.

Conservation and Future

लखौरी मिर्च पहाड़ की एक अनमोल पहचान है. यदि इसके उत्पादन और विपणन को सही प्रोत्साहन मिले तो यह किसानों के लिए फिर से आय का अच्छा स्रोत बन सकती है. साथ ही इस पारंपरिक फसल को बचाने से स्थानीय संस्कृति और पहाड़ी स्वाद भी सुरक्षित रहेगा. इसलिए जरूरत है कि सरकार और समाज मिलकर इस खास मिर्च की खेती को बढ़ावा दें.

Suhas
Suhashttps://onlinemaharashtra.com/
Suhas Bhokare is a journalist covering News for https://onlinemaharashtra.com/
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