दीपेंद्र द्विवेदी | कानपुर17 घंटे पहले
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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में एक विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इसमें विभाग के पूर्व छात्र और उद्योगपति दीपक अग्रवाल ने वर्तमान छात्र-छात्राओं के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने और सकारात्मक नजरिया रखने के गुर सिखाए।
नजरिया बदलने से खुलते हैं तरक्की के रास्ते
छात्रों को संबोधित करते हुए रोटरी क्लब ऑफ कानपुर के पूर्व सचिव दीपक अग्रवाल ने कहा कि सफलता का सीधा संबंध संसाधनों या अनुकूल परिस्थितियों से नहीं होता, बल्कि इसकी शुरुआत हमारी सोच से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हमारा दृष्टिकोण सकारात्मक होता है, तो हम कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अवसर तलाश लेते हैं।
यह सकारात्मक मानसिकता ही हमें चुनौतियों से लड़ने की ताकत देती है और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करने के लिए सबसे पहले अपने विचारों को सकारात्मक बनाना बेहद जरूरी है।
अपनी कमियों के बजाय शक्तियों पर ध्यान दें
दीपक अग्रवाल ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि पूर्णता ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं है। उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए समझाया कि एक खराब घड़ी भी दिन में दो बार सही समय बताती है।
इसका सीधा मतलब यह है कि हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई खास प्रतिभा और विशेषता जरूर होती है। अक्सर लोग अपनी कमियों पर इतना ज्यादा ध्यान देने लगते हैं कि वे अपनी असली शक्तियों को ही भूल जाते हैं। अगर हम अपनी क्षमताओं को पहचान लें, तो अपने भीतर छिपी अनंत संभावनाओं को जगा सकते हैं।
कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना है जरूरी
व्याख्यान के दौरान उन्होंने करियर में ग्रोथ के लिए ‘कम्फर्ट जोन’ यानी आराम के क्षेत्र को छोड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आराम का क्षेत्र हमें सुरक्षा का अहसास तो कराता है, लेकिन यह हमारे विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा भी बन सकता है। वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब हम नई चुनौतियों को स्वीकार करना सीखें।
