Maharatna PSU Stocks to BUY: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी SAIL देश की लीडिंग स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है जिसकी क्षमता 20 MTPA है. इसके कुल पांच स्टील प्लांट हैं. आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने इस स्टॉक को शुभ निवेश के तौर पर पिक किया है और अगले 6-12 महीने के लिहाज से निवेश की सलाह दी है. यह शेयर अभी 152 रुपए पर बंद है.
ICICI डायरेक्ट ने SAIL के लिए BUY की रेटिंग और 200 रुपए का टारगेट दिया है. यह टारगेट वर्तमान प्राइस के मुकाबले 31% अधिक है. इस शेयर के लिए 52 वीक्स हाई 168 रुपए और लो 101 रुपए है. इस साल अब तक शेयर ने 2.5% का नेट रिटर्न दिया है जबकि पिछले एक साल का रिटर्न 34% है.
ब्रोकरेज बुलिश क्यों है?
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फिनिश्ड स्टील कंज्यूमर है.
- पर कैपिटा कंजप्शन 103 kg है जो ग्लोबल ऐवरेज 215 kg के आधे से भी कम है.
- FY31 तक सरकार पर कैपिटा स्टील कंजप्शन का लक्ष्य 160 kg पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
SAIL कैपेसिटी एक्सपैंशन प्लान
- SAIL इंडिया की वर्तमान कैपेसिटी 20 MTPA है.
- FY31 तक कैपेसिटी 35 MTPA पर पहुंचाने की तैयारी.
36000 करोड़ का कैपेक्स
कैपेसिटी एक्सपैंशन के लिए IISCO की वर्तमान कैपेसिटी 2.5 MTPA को FY29 तक 7.1 MTPA पर पहुंचाने की योजना है. इसके लिए 36000 करोड़ रुपए का कैपेक्स किया जाएगा. कंपनी ब्राउनफील्ड एक्सपैंशन पर भी फोकस कर रही है. FY28 तक कंपनी की कैपेसिटी 21.5 MT पर पहुंचने की उम्मीद है जो FY25 में 17.9 MT थी.
पीयर्स के मुकाबले वैल्युएशन अट्रैक्टिव
कंपनी का फोकस ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर है. एंप्लॉयी कॉस्ट और दूसरे खर्चों को कम किया जा रहा है जिससे मार्जिन्स में सुधार होगा. वैल्युएशन की बात करें तो FY28 के अनुमानित EV/EBITDA के मुकाबले 6x मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है जबकि दूसरे स्टील प्लेयर्स 8x मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं. ऐसे में रिस्क रिवॉर्ड अट्रैक्टिव नजर आ रहा है. 200 रुपए का टारगेट ब्रोकरेज ने 7x FY28E EV/EBITDA मल्टीपल पर पिक किया है.
ईरान क्राइसिस का असर नहीं
एक अन्य रिपोर्ट में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई क्राइसिस का असर डोमेस्टिक स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर लिमिटेड होगा. ज्यादातर स्टील कंपनियां कोल पर निर्भर हैं. केवल 6% निर्भरता गैस पर है जिसपर लिमिटेड असर देखने को मिलेगा. FY25 में भारत का क्रूड स्टील प्रोडक्शन 152 मिलियन टन था जो FY26 में 168 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है.
