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(as of Mar 19, 2026 09:20:37 UTC – Details)
Pardesiya Novel Book In Hindi :: 9789355622372
जैसे मोहमाया में फँसी आत्मा बार-बार नए शरीर के माध्यम से जन्म लेती रहती है वही हाल स्वयंसेवी संस्थान के इन संस्थापक सदस्यों का था। वे बार-बार कमेटी में वापस आते रहते थे। कभी संरक्षक बनकर तो कभी एक सदस्य का चोला धारण करके किसी-न-किसी रूप में आते जरूर थे। अगर किसी कारणवश न आ पाते तो किसी भटकती आत्मा की तरह यत्र-तत्र-सर्वत्र संस्था के कार्यक्रमों के माध्यम से अपने होने का अहसास कराते रहते।
वे कहीं भी यह जताने से नहीं चूकते थे कि उनके कमेटी में न होने से संस्था का कितना नुकसान हो रहा है उनके बिना सभी कुछ अस्त-व्यस्त हो रहा है। अतः अगली बार कमेटी में उनकी पुनः वापसी बहुत ही आवश्यक है उनके इन वचनों को सुनकर गीता के चौथे अध्याय का ‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ‘ याद आ जाता था। जैसे आत्मा को कोई नहीं मार सकता वैसे ही इन संस्थानों से चिपके लोगों को कोई नहीं हटा सकता था।
– इसी पुस्तक से
मर्मस्पर्शी पठनीय उपन्यास। ये आपको उद्वेलित करेगा और आपकी संवेदना को स्पर्श भी।
Bachpan Se Jawani | Jindagi ki Paheli Udan Novel Book :: 9788199205413
बचपन से जवानी (जिंदगी की पहली उड़ान) में जिंदगी के कटु सत्य को भी फुलवारी में हो रहे क्रिकेट मैच के समानांतर रखकर उम्र और गुजरे जमाने का सामयिक तथा तुलनात्मक व्याख्यान है। घरपरिवार की कहानी उम्र और वक्त के साथ कैसे बदल जाती है और खून के रिश्तों में भी दूरियाँ आ जाती हैं। घर का मालिक रह चुका व्यक्ति अचानक हर जरूरत की चीजें माँगने पर मजबूर हो जाता है। बच्चों के खेलने के दिन गुजर जाते हैं एक दिन वही बच्चे बड़े हो जाते हैं समय के साथ सब बदल जाता है।
यह उपन्यास एक किशोर के ऊपर केंद्रित है जिसका नाम बंसी है। बंसी के जीवन में प्राकृतिक एवं सामाजिक रोमांच के साथसाथ दुःखों की गठरियों का भी समायोजन है। उसकी दुःख की गठरियों में मुख्य रूप से साइकिल की चेन उतरने का दर्द प्रधान है। बाकी बाढ़ पीड़ितों के दर्द को आत्मसात् कर वह पराए दुःख को भी अपना निजी दुःख बना लेता है जिसमें उसका मित्र मनोहर भी शामिल होता है।
दुःखसुख और दुनिया की बेचैनियों से परे बंसी के हृदय में एक निश्चल प्रेमधारा उत्पन्न होती है। एक ऐसी युवती के लिए जो ताँगे पर आनाजाना करती है। यह एक अधूरी कहानी है जो अगली बार पूरी हो जाए शायद ! या फिर कभी भी नहीं।
ASIN : B0FPD9SZR6
Publisher : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Publication date : 8 January 2025
Edition : First Edition
Language : Hindi
Print size : 420 pages
Item Weight : 250 g
Dimensions : 22 x 14 x 1.4 cm
Country of Origin : India
Net Quantity : 2.0 Count
Importer : Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Packer : GreatestSellingBooks
Generic Name : Book