भास्कर न्यूज | अमृतसर हिंदू धर्म चैत्र मास का विशेष महत्व माना गया है। मार्च महीने में चैत्र कृष्ण और शुक्ल पक्ष में पापमोचिनी एकादशी और कामदा एकादशी आ रही है। इन दोनों एकादशियों का धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्व है। चैत्र माह में ही हिंदू नव वर्ष
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पंडित सोहन लाल शास्त्री औरानी र का बाग पंडित राम अवतार के अनुसार एकादशी के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना भगवान विष्णु की विधिवत पूजा विधि विधान से पूजा करना और व्रत रखना अत्यंत फल देही होता है। मान्यता है कि इससे पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष बात यह है कि इन एकादशियों पर कई शुभ योग का भी निर्माण हो रहा है इससे इसका महत्व और बढ़ जाएगा। पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की एकादशी 14 मार्च को सुबह 8:10 से आरंभ होगी जो 15 मार्च सुबह 9:16 पर समाप्त होगी।
ऐसे में 15 मार्च को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। वहीं 16 मार्च को सुबह 6:30 से 8:45 पर बीच पापमोचिनी एकादशी के व्रत का पारण होगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का आरंभ 28 मार्च को सुबह 8:45 से हो रहा है जो 29 मार्च को सुबह 7:46 पर समाप्त होगा। इसी वजह से 29 मार्च को कामना एकादशी मनाई जाएगी।
30 मार्च को कामदा एकादशी का पारण सुबह 6:14 से 7:09 के बीच किया जाएगा। पापमोचिनी और कामना एकादशी व्रत का महत्व: पंडितों के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस एकादशी को लेकर मानता है कि इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से जातकों को अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल सकती है।
वहीं कोई मनोकामना पूर्ण हो सकती है। शास्त्रों के अनुसार कामना एकादशी का भी विशेष महत्व है। इस दिन व्रत रखने और श्री हरि की पूजा करने से मनुष्य को हर तरह से निजात मिल सकती है और सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है।