Monday, March 16, 2026
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हरीश राणा के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ऐत‍िहास‍िक क्‍यों है?

निर्मला राणा अपने बेटे हरीश के साथ (फ़ाइल फ़ोटो)
इमेज कैप्शन, निर्मला राणा अपने बेटे हरीश के साथ (फ़ाइल फ़ोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 11 मार्च 2026 को एक ऐत‍िहास‍िक फ़ैसला द‍िया है, जिसके ज़रिए कोर्ट ने 32 साल के हरीश राणा के जीवन रक्षक इलाज को रोकने की इजाज़त दे दी है.

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा, ”हरीश के परिवार से हम कहना चाहते हैं कि हमें इस बात का अहसास है कि यह फ़ैसला भावनात्मक रूप से कितना मुश्‍क‍िल है. यह फ़ैसला कभी-कभी समर्पण या हार मानने जैसा लग सकता है लेकिन हमारे मुताबिक़, यह दरअसल गहरी करुणा और साहस भरा क़दम है.”

“आप अपने बेटे को छोड़ नहीं रहे हैं. आप उसे गरिमा के साथ विदा होने की इजाज़त दे रहे हैं. यह आपके निःस्वार्थ प्रेम और उसके प्रति आपकी गहरी निष्ठा दिखाता है.”

यह फ़ैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनाया.

हरीश राणा साल 2013 से ‘वेजिटेटिव’ हालत में हैं. यानी वो ज़िंदा हैं, लेकिन उनमें चेतना नहीं है और वो अपने शरीर पर क‍िसी तरह क़ाबू नहीं कर सकते.

Suhas
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Suhas Bhokare is a journalist covering News for https://onlinemaharashtra.com/
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