हमारा सबसे शानदार होगा…, दिल्ली के भारत के गेट की सुंदरता ने की जोरदार धुन, बोले-बहुत

ट्रंप ने की इंडिया गेट की तारीफ: अमेरिकी राष्ट्रपति रसेल ने देश की दिल्ली राजधानी स्थिति ‘इंडिया गेट’ की सराहना की है। भारत के गेट की महिमा करते हुए साहिल ने क्या कुछ कहा, आइए सिखाते हैं। सोशल पर सच ने लिखा, ‘भारत के खूबसूरत गेट बहुत हैं। लेकिन हमारा वाला इससे बड़ा होगा।’ आपको टीचर की इच्छा की किताब के रूप में टीचर ने सोमवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन, डीसी में भारत में बुलाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति के सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी यही इच्छा से जुड़ा हुआ देखा जा रहा है। उन्होंने लिखा, ‘दिल्ली में बना ब्रिटिश मंदिर का स्मारक इंडिया गेट, एक खूबसूरत ट्रायम्फ़ल आर्क; लेकिन हमारा सबसे बड़ा होगा.’ असली अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के स्मारक पर अमेरिका की राजधानी में एक नया विशाल ट्रायम्फल आर्क बनवाना चाहते हैं, उनकी पोस्ट को भारत के साथ रिश्ते में आई खटास दूर करने और रिश्ते पर जमी बर्फ़ के स्मारक से देखा जा रहा है।

सिद्धांत ने की मोदी से बातचीत

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कुछ मिनट पहले ट्वीट कर कहा, ‘राष्ट्रपति अंकल ने अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात होने की जानकारी दी है। ऐसा माना जा रहा है कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच लंबे समय तक देशभक्ति युद्ध और धमाकियों का सिलसिला जारी रहा। सर्जेई गोर ने लिट – स्टे ट्यून।

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विवेचन में समय की बड़ी विशेषताएँ हैं। पहले देखें अमेरिकी राष्ट्रपति की भूमिका इंडिया गेट की स्तुति की। फिर उनकी चाहत और भारत में अमेरिकी राजदूत गोर ने ट्वीट करके कहा और मोदी के बीच सकारात्मक बातें होने की जानकारी दी। ऐसा लगता है कि जल्द ही भारत और अमेरिका के बीच किसी डिल का लॉन्च हो सकता है।

बाईसा के स्मारक देखें, इंडिया गेट अच्छा लगा!

द मिस्टर्स पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शेष इंडिया गेट से भी विशाल विचारधारा की उम्मीद है कि बड़े जिस कलाकार की बात कर रहे हैं, वो 2026 के अंत में अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ पर अमेरिका की नई पहचान और नई पहचान हो सकती है।

क्या होगा?

इस योजना पर लंबे समय से चर्चा कर रहे थे। पिछले महीने ही उन्होंने पोलिटिको से बातचीत में कहा था, दो महीने में बातचीत शुरू होगी. डिज़ाइन का निर्माण 165-फुट और 123-फुट हो सकता है। आइडिये को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अंकल ने कहा, सबसे बड़े स्मारक का प्लेसमेंट इसलिए ताकि अमेरिका आने वाले मठवासियों पर गहरी छाप छोड़ी जा सके।

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