उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दो बेटियों ने भेदभाव से तंग आकर सो रहे पिता का गला काट दिया. सबूत मिटाने के बाद वे चैन से सो गईं और अगले दिन मां के आंसू पोंछकर निर्दोष होने का नाटक करती रहीं. हालांकि, पुलिस की सख्ती के आगे वो टूट गईं और अपना जुर्म कबूल कर लिया. इस घटना से इलाके में सनसनी फ़ैल गई है.
आपको बता दें कि मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र स्थित मोरना गांव में 60 वर्षीय दलित किसान राम प्रसाद का खून से लथपथ शव उनके घर में मिला. पुलिस ने शक के आधार पर मृतक की 32 वर्षीय बेटी कोमल और 16 वर्षीय नाबालिग छोटी बेटी को हिरासत में लेकर पूछताछ की. दोनों ने स्वीकार किया कि पिता द्वारा बेटा-बेटी में फर्क करने और उन पर पाबंदियां लगाने के कारण उन्होंने रात में चाकू से उनकी गर्दन काट दी. हत्या के बाद सबूत छिपाने के लिए उन्होंने खून से सने कपड़े और चाकू भूसे के ढेर में छिपा दिए थे. पुलिस ने निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद कर दोनों को जेल भेज दिया है.
पाबंदियों से परेशान होकर दी दर्दनाक मौत
पूछताछ में बेटियों ने बताया कि उनका पिता राम प्रसाद हमेशा उनके साथ भेदभाव करता था. वह उन पर हर छोटी बात के लिए टोकता था और पाबंदियां लगाता था. इसी मानसिक प्रताड़ना से ऊबकर दोनों बहनों ने अपने ही घर में पिता के कत्ल की साजिश रची. जब राम प्रसाद सो रहे थे, तब उनकी गर्दन पर चाकू से वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया.
भूसे के ढेर में छिपाए सबूत
वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों बहनों ने बड़ी चालाकी से सबूत मिटाने की कोशिश की. उन्होंने अपने खून से सने कपड़ों और आला कत्ल (चाकू) की एक पोटली बनाई और उसे घर में ही मौजूद भूसे के ढेर में गहरा दबा दिया. उन्हें लगा कि पुलिस को इस पर शक नहीं होगा, लेकिन सघन तलाशी और कड़ाई से पूछताछ के दौरान कोमल और उसकी छोटी बहन टूट गईं और जुर्म कबूल लिया.
पुलिस की गिरफ्त में ‘कातिल’ बेटियां
मुजफ्फरनगर के एसपी ग्रामीण आदित्य बंसल ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी. प्राथमिक जांच और पारिवारिक कलह की खबरों के बाद बेटियों पर शक हुआ. बेटियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू और कपड़े बरामद कर लिए गए हैं. पुलिस ने विजुअल साक्ष्यों और बाइट के आधार पर कानूनी कार्यवाही पूरी करते हुए दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है.
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