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ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव काफ़ी
दिलचस्प हो गया है. ओडिशा के विपक्षी दलों कांग्रेस और बीजेडी ने बीजेपी पर
विधायकों की ‘ख़रीद-फ़रोख़्त’ का आरोप लगाया है.
बीजेडी ने अपने दो विधायकों और कांग्रेस ने एक
विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया है कि ओडिशा कांग्रेस के 9 विधायकों को राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में वोट देने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की गई है. शिवकुमार ने इसे बीजेपी के ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा बताया है.
वहीं शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी बीजेपी पर हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप लगाया था.
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं की रिपोर्टों के बाद कांग्रेस ने 9 विधायकों और ओडिशा के कांग्रेस अध्यक्ष भक्त दास को तीन दिन पहले भुवनेश्वर से बेंगलुरु भेजा था. दावा है कि रिश्वत देने की घटना रविवार सुबह बेंगलुरु-मैसूर हाईवे पर बने एक रिज़ॉर्ट में हुई.
राज्यसभा के इस
चुनाव में बीजेपी को अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए तीन वोट कम पड़ रहे हैं,
जबकि बीजेडी और कांग्रेस दोनों पार्टियों में अंदरूनी असंतोष बताया
जा रहा है.
147 सदस्यों
वाली ओडिशा विधानसभा से राज्यसभा जाने के लिए हर एक उम्मीदवार को 30
प्रथम वरीयता वोटों की ज़रूरत है. बीजेपी के तीन और नवीन पटनायक के नेतृत्व
वाली बीजेडी के दो उम्मीदवार मैदान में उतरने के बाद चुनाव और दिलचस्प हो गया है.
डीके शिवकुमार ने कहा, “सुबह क़रीब 10 बजे चार लोग एक विधायक के पास आए. चारों ने एक व्यक्ति सुरेश की मदद से रिज़ॉर्ट में कमरा बुक किया था. ख़ाली चेक दिखाकर विधायक से कहा कि उन्हें पाँच करोड़ रुपये दिए जाएंगे.”
इनमें से दो लोगों को रामनगर पुलिस ने पकड़ लिया, जबकि दो फ़रार हो गए. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “ये घटना सुबह 10 बजे की है. पकड़े गए लोगों में एक ओडिशा का और एक कर्नाटक का है. उनसे पूछताछ की जा रही है.”
रामनगर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 173 और प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट की धारा 7ए के तहत मामला दर्ज किया है, जो किसी लोक सेवक को प्रभावित करने की कोशिश से संबंधित है.
अब कांग्रेस विधायक और ओडिशा के पांच अन्य नेता बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास एक फाइव स्टार होटल में शिफ़्ट किए जा रहे हैं. यह फ़ैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात के बाद लिया गया. सोमवार की सुबह इन्हें भुवनेश्वर ले जाया जाएगा.

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ओडिशा विधानसभा में दलों की स्थिति इस तरह है:बीजेपी – 81 (79 बीजेपी + 3 निर्दलीय),बीजेडी – 48,कांग्रेस – 14,सीपीएम – 1,निर्दलीय – 2
बीजेडी दो उम्मीदवारों का समर्थन कर रही है. इनमें एक पार्टी के ही संतरुप्त मिश्रा और दूसरे दत्तेश्वर होटा हैं जिन्हें बीजेडी, कांग्रेस और सीपीएम का समर्थन है.
बीजेडी के संतरुप्त मिश्रा को 30 प्रथम वरीयता वोट देने के बाद पार्टी के पास 18 वोट बचते हैं. इसके साथ कांग्रेस के 14 और सीपीएम का एक वोट मिलाकर विपक्ष के पास कुल मिलाकर तीन वोट अतिरिक्त बचेंगे.
हालांकि बीजेडी और कांग्रेस दोनों के भीतर असंतोष की ख़बरें हैं.
यह साफ़ नहीं है कि बीजेडी से निलंबित चंपुआ सीट से विधायक सनातन महाकुद, बीजेडी से निष्कासित पटकुड़ा के विधायक अरविंद महापात्रा और चौदवार-कटक के बीजेडी विधायक सौविक बिस्वाल किसके समर्थन में वोट करेंगे.
वहीं कांग्रेस में भी बाराबती-कटक की विधायक सोफ़िया फ़िरदौस की ओर से भी विरोध के सुर सुनाई दिए हैं. उनका दावा है कि उनसे उम्मीदवार तय करते समय सलाह नहीं ली गई. यह साफ़ नहीं है कि वो किसे वोट करेंगी.
दूसरी ओर बीजेपी के सामने निवर्तमान सांसद सुजीत कुमार और राज्य बीजेपी अध्यक्ष मनमोहल समाल को राज्यसभा में लाने को लेकर चुनौती नहीं है.
तीसरे निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के चुने जाने को लेकर उसके आगे समस्या है.
बीजेपी के पास 19 और तीन निर्दलीय वोट हैं. उसको तीसरी सीट जीतने के लिए आठ अतिरिक्त वोटों की ज़रूरत है.