इंडस्ट्रियल डीजल 21.92 रुपये लीटर हुआ महंगा, कहां होता है इस्तेमाल? और क्या-क्या चीजें होने वाली हैं महंगी – Industrial Diesel Price Hike to Hit Manufacturing and large trade tuta

इंडस्ट्रियल डीजल 21.92 रुपये लीटर हुआ महंगा, कहां होता है इस्तेमाल? और क्या-क्या चीजें होने वाली हैं महंगी – Industrial Diesel Price Hike to Hit Manufacturing and large trade tuta

प्रीमियम पेट्रोल के बाद अब इंडस्ट्रियल डीजल करीब 25 फीसदी महंगा हो गया है. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत 87.67 रुपये लीटर से बढ़ाकर 109.59 प्रति लीटर कर दी है, यानी झटके में 21.92 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है. ये कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं.  

दरअसल, इस उछाल के पीछे तेल कंपनियों ने क्रूड ऑयल का महंगा होना बताया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का भाव 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जो कि पिछले करीब 25 दिन में 35 फीसदी महंगा हो चुका है. इसका सीधा असर अब उद्योग और बिजली उत्पादन की लागत को प्रभावित करेगी, यानी आगे चलकर आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ने वाली है.

सबसे पहले आपको बताते हैं कि असल में ये इंडस्ट्रियल डीजल होता क्या है? क्या ये क्वालिटी में आम डीजल से अलग होता है? बिल्कुल नहीं,  इंडस्ट्रियल डीजल भी High Speed Diesel (HSD) होता है, जो रिफाइनरी से निकलता है और पेट्रोल पंप पर मिलने वाले डीजल जैसा ही होता है. वास्तविकता में दोनों का बेसिक फ्यूल एक ही होता है.

बड़े उद्योग में इंडस्ट्रियल डीजल का इस्तेमाल

हालांकि इसका इस्तेमाल आम गाड़ियों में नहीं, बल्कि बड़े औद्योगिक कामों के लिए किया जाता है. इसलिए इसे Industrial डीजल कहा जाता है. अक्सर इसे बल्क में कंपनी द्वारा सीधे उद्योग को बेचा जाता है. इसमें आमतौर पर कोई सब्सिडी नहीं होती है, जबकि रिटेल डीजल में सब्सिडी होती है.

एक और उदाहरण से समझें तो रिटेल डीजल की बिक्री पंप से होती है. जबकि इंडस्ट्रियल डीजल को ऑयल कंपनियां सीधे टैंकर से उद्योग तक पहुंचाती हैं. उद्योग जगत जरूरत के हिसाब से सीधे ऑयल कंपनियों को बल्क में ऑर्डर देते हैं, जिसका सप्लाई टैंकर से किया जाता है.  इंडस्ट्रियल डीजल पर टैक्स स्ट्रक्चर अलग होता है. आसान शब्दों में कहें तो पेट्रोल पंप पर इंडस्ट्रियल डीजल नहीं मिलता है, और फिलहाल पंप पर मिलने वाले डीजल के दाम में कोई इजाफा नहीं किया गया है. 

पंप पर नहीं मिलता है इंडस्ट्रियल डीजल

बता दें, रिटेल और इंडस्ट्रियल डीजल में फर्क मुख्य रूप से टैक्स, खरीदने के तरीके और उपयोग के पैटर्न में होता है. पेट्रोल पंप पर मिलने वाला डीजल रिटेल कैटेगरी में आता है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (जैसे एक्साइज और VAT) शामिल होते हैं. वहीं इंडस्ट्री या पॉवर सप्लायर ऑयल कंपनियों से थोक में डीजल खरीदते हैं. 

इंडस्ट्रियल डीजल का उपयोग इंडस्ट्री में यह डीजल मशीनें चलाने, जेनरेटर (DG सेट), बॉयलर और बैकअप पावर के लिए खासकर उपयोग किया जाता है. हालांकि इंडस्ट्रियल डीजल भी महंगे होने से बोझ आम उपभोक्ता पर भी पड़ता है, क्योंकि फैक्ट्री प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे, जेनरेटर से एनर्जी सप्लाई महंगी हो जाएंगी. 

इंडस्ट्रियल डीजल महंगा होने से मैन्युफैक्चरिंग और बिजली की लागत बढ़ जाती है. क्योंकि कई फैक्ट्रियां रोजमर्रा की चीजें बनाती हैं, वो महंगी हो जाएंगी, सीमेंट और स्टील महंगा हो सकता है. क्योंकि प्लांट को चलाने के लिए इंडस्ट्रियल डीजल का भी इस्तेमाल होता है, फैक्ट्रियों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां कीमतें बढ़ा देंगी. जेनरेटर के लिए डीजल महंगे होने से मॉल, अस्पताल और ऑफिस की लागत भी बढ़ सकती है. यानी आखिरकार आम आदमी को ही इसका झटका लगने वाला है.

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