Tuesday, March 10, 2026
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मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सोने-चांदी में भारी गिरावट, एक झटके में ₹18000 तक गिरे दाम

MCX पर क्या है सोने के ताजा रेट?

खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर 2 अप्रैल डिलिवरी वाला सोना 1.29 फीसदी टूट गया और कीमत 2140 रुपए गिरकर 1,64,200 रुपए (gold worth at the moment) प्रति 10 ग्राम हो गई।

इस दौरान इसका हाई लेवल 1,64,400 रुप और लो लेवल 1,59,649 रुपए (gold charge at the moment) रहा। जबकि पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 1,66,074 रुपए पर क्लोज हुआ था। उस हिसाब से देखें तो सोना 6425 रुपए टूट गया।

MCX पर कितनी सस्ती हो गई चांदी?

चांदी में 18000 रुपए तक की गिरावट दर्ज हुई। खबर लिखे जाने तक 5 मई 2026 डिलिवरी वाली चांदी में 4.55 फीसदी की कमी देखी गई और कीमत 12,681 रुपए गिरकर 2,65,800 रुपए (silver worth at the moment) हो गई।

कारोबारी सत्र के दौरान इसका हाई लेवल 2,67,342 रुपए (silver charge at the moment) और लो लेवल 2,60,010 रुपए रहा। जबकि पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 2,78,481 रुपए पर क्लोज हुई थी। पिछले सत्र और आज के लो लेवल के हिसाब से देखें तो चांदी में 18,471 रुपए की कमी दर्ज हुई।

यह भी पढ़ें- Gold Price Hike: सोने में जोरदार उछाल, दिन भर में ₹8300 महंगा; Israel-Iran War के बीच कहां तक जाएंगे दाम?

बड़ा सवाल: बढ़ने के बजाय क्यों आई गिरावट?

दरअसल, इस बार सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की डिमांड को मजबूत अमेरिकी डॉलर ने दबा दिया है। डॉलर इंडेक्स पिछले 5 दिनों में 1.4% चढ़ चुका है। यह इंडेक्स 96 तक गिरने के बाद अब 100 के करीब पहुंच गया है, जो आखिरी बार मई 2025 में देखा गया था। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना-चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स पर दबाव आता है।

साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और मिडिल ईस्ट तनाव के कारण महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी की ओर झुके हैं। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि सोना-चांदी जैसे बिना ब्याज वाले निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं।

तेल की कीमतें मंगलवार को करीब 9% उछलकर 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं। उधर सोना भी दबाव में रहा और 4% गिरकर 5,111 डॉलर प्रति औंस से नीचे चला गया। चांदी ने पिछले सत्र की गिरावट को आगे बढ़ाया।

फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी अहम फैक्टर है। अब अगली दर कटौती की उम्मीद जुलाई से खिसककर सितंबर पर पहुंच गई है। 2026 में दो बार 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की उम्मीद है। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनी रहीं तो सोना-चांदी पर दबाव बना रह सकता है।

इस बीच अमेरिका के ईरान पर हमले तेज होने की आशंका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

अगर डॉलर और यील्ड मजबूत रहते हैं तो चांदी में और दबाव दिख सकता है। शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स सतर्क रहें। लॉन्ग टर्म निवेशक गिरावट को चरणबद्ध खरीद के मौके के तौर पर देख सकते हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है।

 

 

Suhas
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Suhas Bhokare is a journalist covering News for https://onlinemaharashtra.com/
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